और कोई कहते हैं कि नहीं, उसका अस्तित्व फिर भी रहता है, उन दोनों बातों में कौन-सी सत्य है..? संसार में इस संबंध में अनेक प्रकार के उत्तर मिलते हैं। जितने प्रकर के दर्शन या धर्म संसार में हैं, वे सब वास्तव में इस प्रश्न के विभिन्न उत्तरों से परिपूर्ण हैं। अनेक बार तो इन प्रश्नों के-परे क्या है? सत्य क्या है? प्राणों की इस महती अशान्ति का अवदमन करने की चेष्टा की गई है। किन्तु जब तक मृत्यु नामक वस्तु जगत् में है, तब तक इस
और कोई कहते हैं कि नहीं, उसका अस्तित्व फिर भी रहता है, उन दोनों बातों में कौन-सी सत्य है..? संसार में इस संबंध में अनेक प्रकार के उत्तर मिलते हैं। जितने प्रकर के दर्शन या धर्म संसार में हैं, वे सब वास्तव में इस प्रश्न के विभिन्न उत्तरों से परिपूर्ण हैं। अनेक बार तो इन प्रश्नों के-परे क्या है? सत्य क्या है? प्राणों की इस महती अशान्ति का अवदमन करने की चेष्टा की गई है। किन्तु जब तक मृत्यु नामक वस्तु जगत् में है, तब तक इस