‘‘तुम जानते हो कि ये वेद दो भागों में विभक्त हैं-कर्मकाण्ड और ज्ञानकाण्ड। कर्मकाण्ड में नाना प्रकार के याग-यज्ञ और अुनष्ठान पद्वतियां हैं, जिनका अधिकांश आजकल प्रचलित नहीं है। ज्ञानकाण्ड में वेदों के आध्यात्मिक उपदेश लिपिबद्व हैं-वे उपनिषद् अथवा ‘वेदान्त’ के नाम से परिचित हैं और द्वैतवादी, विशिष्टाद्वैतवादी समस्त दार्शनिकों और आचार्यों ने उन्हीं को उच्चतक प्रमाण कहकर स्वीकार किया है।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 124)
हम समझते
‘‘तुम जानते हो कि ये वेद दो भागों में विभक्त हैं-कर्मकाण्ड और ज्ञानकाण्ड। कर्मकाण्ड में नाना प्रकार के याग-यज्ञ और अुनष्ठान पद्वतियां हैं, जिनका अधिकांश आजकल प्रचलित नहीं है। ज्ञानकाण्ड में वेदों के आध्यात्मिक उपदेश लिपिबद्व हैं-वे उपनिषद् अथवा ‘वेदान्त’ के नाम से परिचित हैं और द्वैतवादी, विशिष्टाद्वैतवादी समस्त दार्शनिकों और आचार्यों ने उन्हीं को उच्चतक प्रमाण कहकर स्वीकार किया है।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 124)
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