हैं कि वेदों को संहिता कहकर उन्हें उपनिषदों से अलग कर देने का मुख्य कारण यह है कि उनमें मनुष्य की सोख आध्यात्मिक न होकर एकदम भौतिकवादी है। मनुष्य खुले आकाश के नीचे प्रकृति के सम्पर्क मंे रहता है, प्रकृति से वह जूझता भी है और उसकी उपासना भी करता है। बस, इसी से उसका चिंतन निर्धारित होता है। उपनिषदों के युग में पहुंचकर ही मनुष्य को यह सोचने का अवकाश प्राप्त हुआ कि मृत्यु क्या है, मृत्यु के उपरान्त शरीर का कुछ शेष भी रहता
हैं कि वेदों को संहिता कहकर उन्हें उपनिषदों से अलग कर देने का मुख्य कारण यह है कि उनमें मनुष्य की सोख आध्यात्मिक न होकर एकदम भौतिकवादी है। मनुष्य खुले आकाश के नीचे प्रकृति के सम्पर्क मंे रहता है, प्रकृति से वह जूझता भी है और उसकी उपासना भी करता है। बस, इसी से उसका चिंतन निर्धारित होता है। उपनिषदों के युग में पहुंचकर ही मनुष्य को यह सोचने का अवकाश प्राप्त हुआ कि मृत्यु क्या है, मृत्यु के उपरान्त शरीर का कुछ शेष भी रहता