योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

है या सब यहीं समाप्त हो जाता है और क्या इस प्रत्यक्ष संसार के परे भी कुछ है। उपनिषदों में भी आत्मा संबंधी नचिकेता, सत्यकाम, जडभरत तथा इंद्र और विरोचन आदि की जो कथाएं हैं, वे एक तो बहुत अटपटी और अनुत्कृष्ट हैं और दूसरे, उनमें आत्मा शब्द की चर्चा ही चर्चा है, कोई निश्चित धारणा नहीं। यह धारणा गीता में प्रतिपादित हुई है और बाद में शंकराचार्य, रामानुज, रामकृष्ण परमहंस और विवेकानन्द इत्यादि वेदान्तियों ने उसे आगे विकसित किया है।


664 of 1197

है या सब यहीं समाप्त हो जाता है और क्या इस प्रत्यक्ष संसार के परे भी कुछ है। उपनिषदों में भी आत्मा संबंधी नचिकेता, सत्यकाम, जडभरत तथा इंद्र और विरोचन आदि की जो कथाएं हैं, वे एक तो बहुत अटपटी और अनुत्कृष्ट हैं और दूसरे, उनमें आत्मा शब्द की चर्चा ही चर्चा है, कोई निश्चित धारणा नहीं। यह धारणा गीता में प्रतिपादित हुई है और बाद में शंकराचार्य, रामानुज, रामकृष्ण परमहंस और विवेकानन्द इत्यादि वेदान्तियों ने उसे आगे विकसित किया है।


664 of 1197