135 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
हमंे अब इस धारणा और उसकी विकास प्रक्रिया का ऐतिहासिक भौतिकवाद की दृष्टि से अध्ययन करना है। गीता ही का उदाहरण लीजिए। इस गं्रथ का केन्द्र-बिन्दु वही है, जब अर्जुन कुरूक्षेत्र में कुरूसेना को सामने खड़े देखकर हथियार रख देता है और अपने सारथी कृष्ण से कहता है, ‘‘मैं नहीं लडूंगा क्योंकि मेरे सामने बंधु-बांधवों को मारना पाप है।’’ इस पर श्री कृष्ण उसे उपदेश देते हैं, ‘‘हे अर्जुन, तुम भ्रम में पड़े हो। आत्मा अमर है,
135 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
हमंे अब इस धारणा और उसकी विकास प्रक्रिया का ऐतिहासिक भौतिकवाद की दृष्टि से अध्ययन करना है। गीता ही का उदाहरण लीजिए। इस गं्रथ का केन्द्र-बिन्दु वही है, जब अर्जुन कुरूक्षेत्र में कुरूसेना को सामने खड़े देखकर हथियार रख देता है और अपने सारथी कृष्ण से कहता है, ‘‘मैं नहीं लडूंगा क्योंकि मेरे सामने बंधु-बांधवों को मारना पाप है।’’ इस पर श्री कृष्ण उसे उपदेश देते हैं, ‘‘हे अर्जुन, तुम भ्रम में पड़े हो। आत्मा अमर है,