योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उसे न कोई मार सकता है और न वह कभी मरती है। जिन्हें तुम मारने की बात कहते हो, वे तो पहले ही मरे हुए हैं। इसलिए कायरता छोड़ो, क्षत्रिए का धर्म लड़ना, लड़ो। जीत जाओगे तो धरती पर राज करोगे और यदि मर जाओगे तो स्वर्ग का सुख भोगोगे।’’ बात दरअसल कायरता की नहीं थी। वैदिक युग में, जिसे प्रारम्भिक साम्यवाद कहते हैं, लोक कबीलों में रहते थे। व्यक्तिगत सम्पत्िा नहीं थी, जो कुछ था सम्मिलित था। कबीलों-कबीलों में लड़ाई होती रहती थी, पर एक


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उसे न कोई मार सकता है और न वह कभी मरती है। जिन्हें तुम मारने की बात कहते हो, वे तो पहले ही मरे हुए हैं। इसलिए कायरता छोड़ो, क्षत्रिए का धर्म लड़ना, लड़ो। जीत जाओगे तो धरती पर राज करोगे और यदि मर जाओगे तो स्वर्ग का सुख भोगोगे।’’ बात दरअसल कायरता की नहीं थी। वैदिक युग में, जिसे प्रारम्भिक साम्यवाद कहते हैं, लोक कबीलों में रहते थे। व्यक्तिगत सम्पत्िा नहीं थी, जो कुछ था सम्मिलित था। कबीलों-कबीलों में लड़ाई होती रहती थी, पर एक


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