ही कबीले के भीतर किसी की हत्या तो क्या गाली तक देना पाप समझा जाता था। कौरव और पांडव एक ही कबीले के लोग थे अर्जुन के मस्तिष्क में कबीले के पुराने संस्कार थे इसीलिए उसने लड़ने से इन्कार किया था। पर जब महाभारत का युद्व हुआ तो व्यक्तिगत सम्पत्िा का प्रादुर्भाव हो चुका था। कृष्ण राजा नंद के पुत्र होने के नाते व्यक्तिगत सम्पत्िा की नई विचारधारा से जुड़े हुए थे, उसके श्रेष्ठ प्रवक्ता थे। सम्पत्िा के लिए भाई-भाई की हत्या करे तो
ही कबीले के भीतर किसी की हत्या तो क्या गाली तक देना पाप समझा जाता था। कौरव और पांडव एक ही कबीले के लोग थे अर्जुन के मस्तिष्क में कबीले के पुराने संस्कार थे इसीलिए उसने लड़ने से इन्कार किया था। पर जब महाभारत का युद्व हुआ तो व्यक्तिगत सम्पत्िा का प्रादुर्भाव हो चुका था। कृष्ण राजा नंद के पुत्र होने के नाते व्यक्तिगत सम्पत्िा की नई विचारधारा से जुड़े हुए थे, उसके श्रेष्ठ प्रवक्ता थे। सम्पत्िा के लिए भाई-भाई की हत्या करे तो