योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

मन में ग्लानि उत्पन्न न हो कि वह भाई की हत्या कर रहा है, इसी से ‘आत्मा जन्म रहित है, वह न मरती है और न कोई मार सकता है’-नई विचारधारा का जन्म हुआ।

व्यक्तिगत सम्पत्िा का समाज निश्चय ही प्रारम्भिक साम्यवाद के मुकाबले उन्नति का युग था और नई विचारधारा मनुष्य को आगे ले जाने वाली थी, अतएव श्रीकृष्ण ने अर्जुन को न सिर्फ कबीले के पुराने संस्कारों के बजाए प्रगतिशील विचारधारा दी, बल्कि उसके दोनों हाथों में लड्डू थमा दिए। ‘‘बेटा,


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मन में ग्लानि उत्पन्न न हो कि वह भाई की हत्या कर रहा है, इसी से ‘आत्मा जन्म रहित है, वह न मरती है और न कोई मार सकता है’-नई विचारधारा का जन्म हुआ।

व्यक्तिगत सम्पत्िा का समाज निश्चय ही प्रारम्भिक साम्यवाद के मुकाबले उन्नति का युग था और नई विचारधारा मनुष्य को आगे ले जाने वाली थी, अतएव श्रीकृष्ण ने अर्जुन को न सिर्फ कबीले के पुराने संस्कारों के बजाए प्रगतिशील विचारधारा दी, बल्कि उसके दोनों हाथों में लड्डू थमा दिए। ‘‘बेटा,


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