लड़ो, जीत जाओगे तो यहां राज करोगे और मर गए तो स्वर्ग प्राप्त होगा।’’
इस व्यक्तिगत सम्पत्िा के उदय से समाज दो वर्गों में विभाजित हो गया। एक वर्ग वह था, जो श्रम करता था, जिनका संबंध श्रम से टूट गया था, पर उन्हें जीवन की सारी सुख-सुविधाएं प्राप्त थी। और उन्हें अपनी विचार-शक्ति द्वारा दूसरों पर शासन करना था। समाज वर्गों में विभाजित हुआ तो मनुष्य की सोच का भी ‘करो’ और ‘न करो’-श्रमजीवियों और सम्पत्िाशलियों की विचारधारा में
लड़ो, जीत जाओगे तो यहां राज करोगे और मर गए तो स्वर्ग प्राप्त होगा।’’
इस व्यक्तिगत सम्पत्िा के उदय से समाज दो वर्गों में विभाजित हो गया। एक वर्ग वह था, जो श्रम करता था, जिनका संबंध श्रम से टूट गया था, पर उन्हें जीवन की सारी सुख-सुविधाएं प्राप्त थी। और उन्हें अपनी विचार-शक्ति द्वारा दूसरों पर शासन करना था। समाज वर्गों में विभाजित हुआ तो मनुष्य की सोच का भी ‘करो’ और ‘न करो’-श्रमजीवियों और सम्पत्िाशलियों की विचारधारा में