‘‘आप किसी विजय पर फूले नहीं समाते? आपने अपने ही सगे-संबंधियों की हत्या करके घोर पाप किया है।’’ स्वागत को आए हुए पंडितों ने युधिष्ठिर को दिलासा दिया, ‘‘महाराज, आप इस पागल की बातों पर न जाइए। आपने धर्म-युद्व लड़ा है। आप धर्मपुत्र है।’’ और चार्वाक को वहीं पथराव करके मार डाला।
चार्वाक साहित्य नष्ट कर दिया गया। लिखा है:
‘‘चार्वाक के अनुयायियों का भारत में एक अत्यन्त प्राचीन सम्प्रदाय था। उसके अनुयायी घोर जड़वादी थे। इस समय
‘‘आप किसी विजय पर फूले नहीं समाते? आपने अपने ही सगे-संबंधियों की हत्या करके घोर पाप किया है।’’ स्वागत को आए हुए पंडितों ने युधिष्ठिर को दिलासा दिया, ‘‘महाराज, आप इस पागल की बातों पर न जाइए। आपने धर्म-युद्व लड़ा है। आप धर्मपुत्र है।’’ और चार्वाक को वहीं पथराव करके मार डाला।
चार्वाक साहित्य नष्ट कर दिया गया। लिखा है:
‘‘चार्वाक के अनुयायियों का भारत में एक अत्यन्त प्राचीन सम्प्रदाय था। उसके अनुयायी घोर जड़वादी थे। इस समय