वह सम्प्रदाय लुप्त हो गया है और उसके अधिकांश ग्रंथ भी लुप्त हो गए हैं। उसके मतानुसार आत्मा और देह भौतिक शक्ति से उत्पन्न होती है, इसीलिए देह का नाश का अस्तित्व है, इसका भी कोई प्रमाण नहीं है। वह केवल इंद्रियजन्य प्रत्यक्ष ज्ञान स्वीकार करता है-अनुमान द्वारा भी ज्ञान प्राप्त हो सकता है, इसे वह स्वीकार नहीं करता।’’ (दशम खंड, पृष्ठ 41)
शंकराचार्य का भाष्य चार्वाक्-दर्शन के खंडन के अतिरिक्त और कुछ नहीं । भौतिकवादियों को वामाचारी और अनाचारी कहकर बदनाम किया गया,
वह सम्प्रदाय लुप्त हो गया है और उसके अधिकांश ग्रंथ भी लुप्त हो गए हैं। उसके मतानुसार आत्मा और देह भौतिक शक्ति से उत्पन्न होती है, इसीलिए देह का नाश का अस्तित्व है, इसका भी कोई प्रमाण नहीं है। वह केवल इंद्रियजन्य प्रत्यक्ष ज्ञान स्वीकार करता है-अनुमान द्वारा भी ज्ञान प्राप्त हो सकता है, इसे वह स्वीकार नहीं करता।’’ (दशम खंड, पृष्ठ 41)
शंकराचार्य का भाष्य चार्वाक्-दर्शन के खंडन के अतिरिक्त और कुछ नहीं । भौतिकवादियों को वामाचारी और अनाचारी कहकर बदनाम किया गया,