उठाकर मल्लाहों को डांटा और बच्चों को छोड़ देने का आदेश दिया। गोरे सिपाहियों को देखकर मल्लाह लोग डरे और अपनी-अपनी नावों में चले गए। यों नरेन्द्र के साथियों ने संकट से छुटकारा पाया। दोनों सिपाही नरेन्द्र के इस आचरण से बहुत प्रसन्न हुए। वह उसे अपने साथ थियेटर ले जाना चाहते थे। पर वह अपने हमजोलियों के साथ लौट आया।
नरेन्द्र को भय दिखाकर किसी काम से रोकना संभव नहीं था। इस सिलसिले की एक घटना इस प्रकार है।
उसके एक पड़ोसी साथी
उठाकर मल्लाहों को डांटा और बच्चों को छोड़ देने का आदेश दिया। गोरे सिपाहियों को देखकर मल्लाह लोग डरे और अपनी-अपनी नावों में चले गए। यों नरेन्द्र के साथियों ने संकट से छुटकारा पाया। दोनों सिपाही नरेन्द्र के इस आचरण से बहुत प्रसन्न हुए। वह उसे अपने साथ थियेटर ले जाना चाहते थे। पर वह अपने हमजोलियों के साथ लौट आया।
नरेन्द्र को भय दिखाकर किसी काम से रोकना संभव नहीं था। इस सिलसिले की एक घटना इस प्रकार है।
उसके एक पड़ोसी साथी