योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

के घर में चम्पक फूल का एक पेड़ था। पेड़ की टहनी में पैर की गोंफ डालकर सिर और हाथ नीचे लटकाकर झूलना नरेन्द्र का प्रिय खेल था। एक दिन वह पेड़ की ऊंची टहनी पर इसी प्रकार झूल रहा था कि उसके एक साथी का दादा उधर आ निकला। बूढ़े का हृदय भय से कांप गया। एक तो ऊंचाई दूसरे नरेन्द्र के उत्पात से टहनी टूटने की काफी आशंका थी। बूढ़ा यह भी जानता था कि नरेन्द्र डराने-धमकाने से मानने वाला नहीं। इसलिए उसने दुलार से कहा, ‘‘बेटा, इस पेड़ पर न चढ़!


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के घर में चम्पक फूल का एक पेड़ था। पेड़ की टहनी में पैर की गोंफ डालकर सिर और हाथ नीचे लटकाकर झूलना नरेन्द्र का प्रिय खेल था। एक दिन वह पेड़ की ऊंची टहनी पर इसी प्रकार झूल रहा था कि उसके एक साथी का दादा उधर आ निकला। बूढ़े का हृदय भय से कांप गया। एक तो ऊंचाई दूसरे नरेन्द्र के उत्पात से टहनी टूटने की काफी आशंका थी। बूढ़ा यह भी जानता था कि नरेन्द्र डराने-धमकाने से मानने वाला नहीं। इसलिए उसने दुलार से कहा, ‘‘बेटा, इस पेड़ पर न चढ़!


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