उनका वस्तुओं का विश्लेषण कितना पूर्ण एवं अद्भुत था।’ (चतुर्थ खंड, पृष्ठ 204)
क्पिल के अनुसार इस जगत् का सृष्टिकर्ता कोई ईश्वर नहीं है सत्व, रज और तम प्रकृति के तीन ऐसे उपादान हैं, जिनसे समग्र ब्रह्मण्ड की सृष्टि होती है। बुद्वि भी चूंकि प्रकृति से उत्पन्न होती है, इसलिए प्रकृति ही की एक वस्तु है। अलबत्ता प्रकृति और बद्वि से अलग एक तीसरी वस्तु पुरूष है, जो इन्हें गति एवं चेतना प्रदान करती है। कपिल चूंकि प्रकृति और पुरूष दोनों को अनादि तथा निरपेक्ष मानते हैं,
उनका वस्तुओं का विश्लेषण कितना पूर्ण एवं अद्भुत था।’ (चतुर्थ खंड, पृष्ठ 204)
क्पिल के अनुसार इस जगत् का सृष्टिकर्ता कोई ईश्वर नहीं है सत्व, रज और तम प्रकृति के तीन ऐसे उपादान हैं, जिनसे समग्र ब्रह्मण्ड की सृष्टि होती है। बुद्वि भी चूंकि प्रकृति से उत्पन्न होती है, इसलिए प्रकृति ही की एक वस्तु है। अलबत्ता प्रकृति और बद्वि से अलग एक तीसरी वस्तु पुरूष है, जो इन्हें गति एवं चेतना प्रदान करती है। कपिल चूंकि प्रकृति और पुरूष दोनों को अनादि तथा निरपेक्ष मानते हैं,