इसलिए वे द्वेतवादी हैं और प्रकृति को अनादि तथा निरपेक्ष मानने के कारण वे भौतिकवादी भी हैं।
अध्यात्मवादियों ने कपिल के इस सिद्वान्त में संशोधन करके ‘पुरूष’ का नाम ‘आत्मा’ रखा और उसे वेदान्त दर्शन में रूपान्तरित कर लिया। विवेकानन्द कहते हैं:
‘‘सांख्यवादियों के इस मत के विरूद्व वेदान्तवादियों को प्रथम आपत्िा यह है कि सांख्य का यह विश्लेषण सम्पूर्ण नहीं। यदि प्रकृति एक निरपेक्ष वस्तु है एवं आत्मा भी यदि निरपेक्ष वस्तु है,
इसलिए वे द्वेतवादी हैं और प्रकृति को अनादि तथा निरपेक्ष मानने के कारण वे भौतिकवादी भी हैं।
अध्यात्मवादियों ने कपिल के इस सिद्वान्त में संशोधन करके ‘पुरूष’ का नाम ‘आत्मा’ रखा और उसे वेदान्त दर्शन में रूपान्तरित कर लिया। विवेकानन्द कहते हैं:
‘‘सांख्यवादियों के इस मत के विरूद्व वेदान्तवादियों को प्रथम आपत्िा यह है कि सांख्य का यह विश्लेषण सम्पूर्ण नहीं। यदि प्रकृति एक निरपेक्ष वस्तु है एवं आत्मा भी यदि निरपेक्ष वस्तु है,