‘‘हे अर्जुन, मेरे और तेरे पहले बहुत से जन्म हो चुके हैं। उन सबको मैं जानता हूं। तू नहीं जानता।’’
इसी प्रकार माया के बारे में वे कहते हैं:
‘‘मेरी यह दैवी, त्रिगुणमयी माया, बड़ी मुश्किल से पार की जाती है। जो मेरी शरण में आते हैं, वे इस माया से अतीत हो जाते हैं।’’
व्यक्तिगत सम्पत्िा के साथ ही अतिमानव का भी जन्म हुआ।
यों सांख्य दर्शन के आध्यात्मिक रूप ही का नाम वेदान्त दर्शन है। शैव, वैष्णव, बुद्व, जैन, गोरखपंथी,
‘‘हे अर्जुन, मेरे और तेरे पहले बहुत से जन्म हो चुके हैं। उन सबको मैं जानता हूं। तू नहीं जानता।’’
इसी प्रकार माया के बारे में वे कहते हैं:
‘‘मेरी यह दैवी, त्रिगुणमयी माया, बड़ी मुश्किल से पार की जाती है। जो मेरी शरण में आते हैं, वे इस माया से अतीत हो जाते हैं।’’
व्यक्तिगत सम्पत्िा के साथ ही अतिमानव का भी जन्म हुआ।
यों सांख्य दर्शन के आध्यात्मिक रूप ही का नाम वेदान्त दर्शन है। शैव, वैष्णव, बुद्व, जैन, गोरखपंथी,