कबीरपंथी, नानकपंथी, दादूपंथी इत्यादि हिन्दू धर्म के अंतर्गत जितने भी सम्प्रदाय हैं, सभी वेदान्तवादी है। ईश्वर के अस्तित्व तथा उसके सगुण और निर्गुण रूप के बारे में उनमें चाहे कुछ भी मतभेद हों, पर वे मोटे तौर पर द्वैतवादियों, विशिष्टाद्वैतवादियों और अद्वैतवादियों में बंटे हुए हैं। वेदान्त दर्शन के सिद्वान्त को क्रमशः विकसित करने वालों में शंकराचार्य, रामानुज, रामकृष्ण परमहंस और विवेकानन्द विशेष रूप से उल्लेखनीय है। विस्तार में जाने की गुंजाइश नहीं। हम सिर्फ द्वैतवाद,
कबीरपंथी, नानकपंथी, दादूपंथी इत्यादि हिन्दू धर्म के अंतर्गत जितने भी सम्प्रदाय हैं, सभी वेदान्तवादी है। ईश्वर के अस्तित्व तथा उसके सगुण और निर्गुण रूप के बारे में उनमें चाहे कुछ भी मतभेद हों, पर वे मोटे तौर पर द्वैतवादियों, विशिष्टाद्वैतवादियों और अद्वैतवादियों में बंटे हुए हैं। वेदान्त दर्शन के सिद्वान्त को क्रमशः विकसित करने वालों में शंकराचार्य, रामानुज, रामकृष्ण परमहंस और विवेकानन्द विशेष रूप से उल्लेखनीय है। विस्तार में जाने की गुंजाइश नहीं। हम सिर्फ द्वैतवाद,