इस पर तो ब्रह्मराक्षस रहते हैं।’’ नरेन्द्र बोला, ‘‘कहां हैं ब्रह्मराक्षस! ळमने तो देखा नहीं’’। बूढे़ ने फिर कहा, ‘‘ब्रह्मराक्षस दिखाई थोड़े ही देता है। वह तो बिना दिखाई एि ही गर्दन झपट लेता है।’’ बूढे़ ने ब्रह्मराक्षस की विकट आकृति का वर्णन किया और क्रूरता के दो-चार उदाहरण देकर समझाया कि वह अपने आश्रित पेड़ का अपमान कभी सहन नहीं करेगा। नरेन्द्र को चुप देखकर
21 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
बूढे़ ने समझा कि सीख काम कर गई।
इस पर तो ब्रह्मराक्षस रहते हैं।’’ नरेन्द्र बोला, ‘‘कहां हैं ब्रह्मराक्षस! ळमने तो देखा नहीं’’। बूढे़ ने फिर कहा, ‘‘ब्रह्मराक्षस दिखाई थोड़े ही देता है। वह तो बिना दिखाई एि ही गर्दन झपट लेता है।’’ बूढे़ ने ब्रह्मराक्षस की विकट आकृति का वर्णन किया और क्रूरता के दो-चार उदाहरण देकर समझाया कि वह अपने आश्रित पेड़ का अपमान कभी सहन नहीं करेगा। नरेन्द्र को चुप देखकर
21 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
बूढे़ ने समझा कि सीख काम कर गई।