ऐसा मान भी लें तो वे एक दूसरे को समीप कर देंगे और दोनों ही समीप हो जाएंगे। अतएव अनन्त एक है अनेक नहीं, और वहीं एक अनन्त आत्मा, पृथक् आत्माओं के रूप में प्रतीत होने वाले असंख्य दर्पणों में प्रतिबिम्बित हो रही हैं। वही अनन्त आत्मा मनुष्य के मन का आधार भी है, जिसे हम जीवात्मा कहते हैं।
140 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
हम पीछे कह चुके हैं कि विवेकानन्द ने अमेरिका और इंग्लैंड में वेदान्त दर्शन की व्याख्या करते-करते उसमें
ऐसा मान भी लें तो वे एक दूसरे को समीप कर देंगे और दोनों ही समीप हो जाएंगे। अतएव अनन्त एक है अनेक नहीं, और वहीं एक अनन्त आत्मा, पृथक् आत्माओं के रूप में प्रतीत होने वाले असंख्य दर्पणों में प्रतिबिम्बित हो रही हैं। वही अनन्त आत्मा मनुष्य के मन का आधार भी है, जिसे हम जीवात्मा कहते हैं।
140 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
हम पीछे कह चुके हैं कि विवेकानन्द ने अमेरिका और इंग्लैंड में वेदान्त दर्शन की व्याख्या करते-करते उसमें