142 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
आते ही दोपहर के सूर्य की प्रखर किरणों से देश अवश्य आलोकित हो जाएगा।’’
(षष्टम खंड, पृष्ठ 126)
व्ह 1998 की बात है। उन्हीं दिनों कुछ विद्यार्थी उनके पास गए और उन्होंने स्वामी जी से कहा कि हमें गीता की शिक्षा दो। स्वामी जी बोले, ‘‘जाओ, मैदान में जाकर फुटबाल खेलो। गीता खेलने की अपेक्षा फुटबाल खेलने से स्वर्ग शीघ्र मिलेगा। देश को लोहे के पुट्ठे और फौलाद के स्नायु वाले युवक चाहिए।’’
ये शब्द कोई धर्मप्रचारक संन्यासी नहीं,
142 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
आते ही दोपहर के सूर्य की प्रखर किरणों से देश अवश्य आलोकित हो जाएगा।’’
(षष्टम खंड, पृष्ठ 126)
व्ह 1998 की बात है। उन्हीं दिनों कुछ विद्यार्थी उनके पास गए और उन्होंने स्वामी जी से कहा कि हमें गीता की शिक्षा दो। स्वामी जी बोले, ‘‘जाओ, मैदान में जाकर फुटबाल खेलो। गीता खेलने की अपेक्षा फुटबाल खेलने से स्वर्ग शीघ्र मिलेगा। देश को लोहे के पुट्ठे और फौलाद के स्नायु वाले युवक चाहिए।’’
ये शब्द कोई धर्मप्रचारक संन्यासी नहीं,