पशु और मनुष्य तीनों का गुण (स्वभाव) प्रकृति का जीवन निश्चित नियमों के अनुसार चलता है और उसी प्रकार मन भी। विचार यों ही उत्पन्न नहीं होते। उनके उदय, अस्तित्व और अन्त का एक नियम है। दूसरे प्रकार में जिस तरह बाह्म प्रकृति नियम से बद्व है, उसी प्रकार आन्तरिक प्रकृति अर्थात् जीवन और मानव-मन भी।’’ (अष्टम खंड, पृष्ठ 120)
यहां तो वे कहते हैं कि विचार यों ही उत्पन्न नहीं होते, लेकिन अपनी पहली विदेश-यात्रा के दौरान लंदन में दिए
पशु और मनुष्य तीनों का गुण (स्वभाव) प्रकृति का जीवन निश्चित नियमों के अनुसार चलता है और उसी प्रकार मन भी। विचार यों ही उत्पन्न नहीं होते। उनके उदय, अस्तित्व और अन्त का एक नियम है। दूसरे प्रकार में जिस तरह बाह्म प्रकृति नियम से बद्व है, उसी प्रकार आन्तरिक प्रकृति अर्थात् जीवन और मानव-मन भी।’’ (अष्टम खंड, पृष्ठ 120)
यहां तो वे कहते हैं कि विचार यों ही उत्पन्न नहीं होते, लेकिन अपनी पहली विदेश-यात्रा के दौरान लंदन में दिए