योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



उन्हें अपना निर्णय करने दो। रासायनिक द्रव्य इकट्ठे कर दो और प्रकृति के नियमानुसार वे कोई विशेष आकार धारण कर लेंगे। परिश्रम करो, अटल रहो और भगवान पर श्रद्वा रखो। काम शुरू कर दो। देर सवेरे मैं आ ही रहा हूं। ‘धर्म को बिना हानि पहुंचाए जनता की उन्नति’-इसे अपना आदर्श वाक्य बना लो।’’ (वही, पृष्ठ 321)

धर्म की इस मान्यता के अनुसार विचारों का अपना अलग अस्तित्व है। सारा ज्ञान आत्मा में निहित है, जो निरपेक्ष सत्य ईश्वर का एक


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उन्हें अपना निर्णय करने दो। रासायनिक द्रव्य इकट्ठे कर दो और प्रकृति के नियमानुसार वे कोई विशेष आकार धारण कर लेंगे। परिश्रम करो, अटल रहो और भगवान पर श्रद्वा रखो। काम शुरू कर दो। देर सवेरे मैं आ ही रहा हूं। ‘धर्म को बिना हानि पहुंचाए जनता की उन्नति’-इसे अपना आदर्श वाक्य बना लो।’’ (वही, पृष्ठ 321)

धर्म की इस मान्यता के अनुसार विचारों का अपना अलग अस्तित्व है। सारा ज्ञान आत्मा में निहित है, जो निरपेक्ष सत्य ईश्वर का एक


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