अंश है। जिस किसी ने इस इंद्रियातीत सत्य का साक्षात्कार कर लिया, वह ब्रह्मज्ञानी है, वह अज्ञान तथा हर प्रकार के बन्धन से मुक्त है। यह सर्वोच्च मानव कोई कर्म नहीं करता, उसे कर्म करने की आवश्यकता ही नहीं रह जाती। वह अपनी विचार-शक्ति ही से दुनिया पर शासन करता है। इस आदर्शवादी सिद्वान्त के अनुसार बुद्व और ईसा जैसे व्यक्ति इतिहास के निर्माता हैं।
23 नवम्बर को सर्वोपरि बल विचार-शक्ति से प्राप्त होता है। जितना ही सूक्ष्मतर तत्व होता है,
अंश है। जिस किसी ने इस इंद्रियातीत सत्य का साक्षात्कार कर लिया, वह ब्रह्मज्ञानी है, वह अज्ञान तथा हर प्रकार के बन्धन से मुक्त है। यह सर्वोच्च मानव कोई कर्म नहीं करता, उसे कर्म करने की आवश्यकता ही नहीं रह जाती। वह अपनी विचार-शक्ति ही से दुनिया पर शासन करता है। इस आदर्शवादी सिद्वान्त के अनुसार बुद्व और ईसा जैसे व्यक्ति इतिहास के निर्माता हैं।
23 नवम्बर को सर्वोपरि बल विचार-शक्ति से प्राप्त होता है। जितना ही सूक्ष्मतर तत्व होता है,