उतना ही अधिक वह शक्ति सम्पन्न होता है विचार की मूक शक्ति दूरस्थ व्यक्ति को भी प्रभावित करती है, क्योंकि मन एक भी है और अनेक भी। विश्व एक जाल है और मानव मन मकड़ियां।’’ (नवम खंड पृष्ठ 192)
मतलब यह कि मनुष्य अपने को शेर समझे तो शेर बन जाएगा, अपने को गीदड़ समझ ले तो गीदड़ बना रहेगा और अपेन वास्तविक रूप को पहचानकर अपने को ब्रह्म समझ ले तो सर्वशक्तिमान ब्रह्म बन जाएगा। ‘सत्याग्रह’ का, ‘स्वराज्य तुम्हारे भीतर है’ का प्रतिक्रियावादी
उतना ही अधिक वह शक्ति सम्पन्न होता है विचार की मूक शक्ति दूरस्थ व्यक्ति को भी प्रभावित करती है, क्योंकि मन एक भी है और अनेक भी। विश्व एक जाल है और मानव मन मकड़ियां।’’ (नवम खंड पृष्ठ 192)
मतलब यह कि मनुष्य अपने को शेर समझे तो शेर बन जाएगा, अपने को गीदड़ समझ ले तो गीदड़ बना रहेगा और अपेन वास्तविक रूप को पहचानकर अपने को ब्रह्म समझ ले तो सर्वशक्तिमान ब्रह्म बन जाएगा। ‘सत्याग्रह’ का, ‘स्वराज्य तुम्हारे भीतर है’ का प्रतिक्रियावादी