योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

सिद्वान्त भी यही है। गांधी का कहना था कि अगर कोई व्यक्ति उपवास, त्याग तथा अहिंसक कर्म द्वारा अपने भीतर के चरम सत्य को जग लेता है तो वह पूर्ण सत्याग्रही बन जाता है। तब दुनिया की कोई शक्ति उसे हरा नहीं सकती। यह पूर्ण सत्याग्रही जब अपने शत्रु की आंखों में आंखें डालेगा तो उसका मन शत्रु के मन को प्रभावित करेगा और तब वह भी शत्रुता त्यागकर पूर्ण सत्याग्रही बन जाएगा। अशुभ और अन्याय का प्रतिरोध गलत है, क्योंकि बुराई फैलती है।


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सिद्वान्त भी यही है। गांधी का कहना था कि अगर कोई व्यक्ति उपवास, त्याग तथा अहिंसक कर्म द्वारा अपने भीतर के चरम सत्य को जग लेता है तो वह पूर्ण सत्याग्रही बन जाता है। तब दुनिया की कोई शक्ति उसे हरा नहीं सकती। यह पूर्ण सत्याग्रही जब अपने शत्रु की आंखों में आंखें डालेगा तो उसका मन शत्रु के मन को प्रभावित करेगा और तब वह भी शत्रुता त्यागकर पूर्ण सत्याग्रही बन जाएगा। अशुभ और अन्याय का प्रतिरोध गलत है, क्योंकि बुराई फैलती है।


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