विचारधारा रही। लेकिन उन्नीसवीं सदी के अंत में जब पूंजीवाद ने अपनी प्रगतिशील भूमिका त्यागकर साम्राज्यवाद का प्रतिक्रियावादी
144 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
रूप धारण किया, तब हम पहले कह चुके हैं, सिर्फ वही बुद्विजीवी इस विचारधारा पर टिके रह सके, जिनका संबंध माक्र्सवादी विचारधारा वाले द्वन्द्वात्मक से जुड़ गया था।
विवेकानन्द हमारे उभरते हुए बुर्जवा के सर्वश्रेष्ठ प्रवक्ता थे। उन्होंने अपनी विदेश-यात्रा के दौरान विज्ञान के उत्कृष्ट तत्व को आत्मसात् किया,
विचारधारा रही। लेकिन उन्नीसवीं सदी के अंत में जब पूंजीवाद ने अपनी प्रगतिशील भूमिका त्यागकर साम्राज्यवाद का प्रतिक्रियावादी
144 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
रूप धारण किया, तब हम पहले कह चुके हैं, सिर्फ वही बुद्विजीवी इस विचारधारा पर टिके रह सके, जिनका संबंध माक्र्सवादी विचारधारा वाले द्वन्द्वात्मक से जुड़ गया था।
विवेकानन्द हमारे उभरते हुए बुर्जवा के सर्वश्रेष्ठ प्रवक्ता थे। उन्होंने अपनी विदेश-यात्रा के दौरान विज्ञान के उत्कृष्ट तत्व को आत्मसात् किया,