है जो हमें वस्तुगत पदार्थ से मनोगत चेतना की तरफ ले जाती है, अस्तित्व से विचारों की तरफ ले जाती है। किसी व्यक्ति की चेतना या विचार (जिनमें सिद्वान्त, नीतियां, योजनाएं अथवा उपाय शामिल हैं) वस्तुगत बाह्म जगत् के नियमों की प्रक्रिया की दूसरी मंज़िल आती है, एक ऐसी मंज़िल जो हमें चेतना की तरफ ले जाती है, विचारों से अस्तित्व की तरफ ले जाती है, तथा जिसमें पहली मंज़िल के दौरान प्राप्त किए गए ज्ञान को सामाजिक व्यवहार में उतारा जाता
है जो हमें वस्तुगत पदार्थ से मनोगत चेतना की तरफ ले जाती है, अस्तित्व से विचारों की तरफ ले जाती है। किसी व्यक्ति की चेतना या विचार (जिनमें सिद्वान्त, नीतियां, योजनाएं अथवा उपाय शामिल हैं) वस्तुगत बाह्म जगत् के नियमों की प्रक्रिया की दूसरी मंज़िल आती है, एक ऐसी मंज़िल जो हमें चेतना की तरफ ले जाती है, विचारों से अस्तित्व की तरफ ले जाती है, तथा जिसमें पहली मंज़िल के दौरान प्राप्त किए गए ज्ञान को सामाजिक व्यवहार में उतारा जाता