योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



नरेन्द्र का यही स्वभाव सारी उम्र बना रहा। किसी भी बात पर विश्वास करने से पहले वह उसे तर्क की कसौटी पर कसता था।

महेन्द्र और भूपेन्द्र उसके छोटे भाई भी हर तरह चुस्त-दुरूस्त थे। पर नरेन्द्र से उनका कोई मुकाबला न था। वह जब नरेन्द्र से स्वामी विवेकानन्द बन गया तो बाल्यकाल के बारे में उसने एक शिष्य से बातें करते हुए कहा,‘‘मैं बचपन ही से जिद्दी शैतान था। नहीं तो क्या खाली हाथ सारी दुनिया घूम आना संभव था।’’


शिक्षा

‘‘चूंकि


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नरेन्द्र का यही स्वभाव सारी उम्र बना रहा। किसी भी बात पर विश्वास करने से पहले वह उसे तर्क की कसौटी पर कसता था।

महेन्द्र और भूपेन्द्र उसके छोटे भाई भी हर तरह चुस्त-दुरूस्त थे। पर नरेन्द्र से उनका कोई मुकाबला न था। वह जब नरेन्द्र से स्वामी विवेकानन्द बन गया तो बाल्यकाल के बारे में उसने एक शिष्य से बातें करते हुए कहा,‘‘मैं बचपन ही से जिद्दी शैतान था। नहीं तो क्या खाली हाथ सारी दुनिया घूम आना संभव था।’’


शिक्षा

‘‘चूंकि


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