योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

इसलिए कि संघर्ष करने वाली शक्तियों के तुलनात्मक बल की दृष्टि से फिलहाल वे शक्तियां उतनी बलशाली नहीं हैं, जितनी कि प्रतिक्रियावादी शक्तियां। इसलिए उन्हें अस्थायी तौर पर पराजय का मुंह देखना पड़ रहा है। लेकिन देर-सवेर विजय अवश्य उन्हीं को प्राप्त होती है। मनुष्य का ज्ञान व्यवहार की कसौटी के जरिए छलांग भरकर एक नई मंज़िल पर पहुंच जाता है। यह छलांग पहले की छलांग से और ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि सिर्फ यही छलांग ज्ञान प्राप्ति


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इसलिए कि संघर्ष करने वाली शक्तियों के तुलनात्मक बल की दृष्टि से फिलहाल वे शक्तियां उतनी बलशाली नहीं हैं, जितनी कि प्रतिक्रियावादी शक्तियां। इसलिए उन्हें अस्थायी तौर पर पराजय का मुंह देखना पड़ रहा है। लेकिन देर-सवेर विजय अवश्य उन्हीं को प्राप्त होती है। मनुष्य का ज्ञान व्यवहार की कसौटी के जरिए छलांग भरकर एक नई मंज़िल पर पहुंच जाता है। यह छलांग पहले की छलांग से और ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि सिर्फ यही छलांग ज्ञान प्राप्ति


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