योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

की पहली छलांग अर्थात् वस्तुगत बाह्म जगत् को प्रतिबिम्बित करने के दौरान बनने वाले विचारों, सिद्वान्तों, नीतियों, योजनाओं अथवा उपमाओं के सही होने अथवा गलत होने को साबित करती है। सच्चाई को परखने का दूसरा कोई तरीका नहीं है। यही नहीं, दुनिया का ज्ञान प्राप्त करने का सर्वहारा वर्ग का एकमात्र उद्देश्य है, उसे बदल डालना। अक्सर सही ज्ञान की प्राप्ति केवल पदार्थ चेतना की तरफ लौटने की प्रक्रिया को, अर्थात् व्यवहार से ज्ञान की तरफ


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की पहली छलांग अर्थात् वस्तुगत बाह्म जगत् को प्रतिबिम्बित करने के दौरान बनने वाले विचारों, सिद्वान्तों, नीतियों, योजनाओं अथवा उपमाओं के सही होने अथवा गलत होने को साबित करती है। सच्चाई को परखने का दूसरा कोई तरीका नहीं है। यही नहीं, दुनिया का ज्ञान प्राप्त करने का सर्वहारा वर्ग का एकमात्र उद्देश्य है, उसे बदल डालना। अक्सर सही ज्ञान की प्राप्ति केवल पदार्थ चेतना की तरफ लौटने की प्रक्रिया को, अर्थात् व्यवहार से ज्ञान की तरफ


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