बलराम बाबू के मकान पर स्वामी जी गुरू-भाइयों के साथ वार्तालाप कर रहे थे। इसी समय उनके एक सन्यासी गुरू-भाई ने सहसा प्रश्न किया कि वे श्री रामकृष्ण का प्रचार क्यों नहीं कर रहे हैं तथा श्री रामकृष्ण की शिक्षा के साथ उनके द्वारा प्रचारित आदर्शों का सामंजस्य कहां है? एकान्त भक्ति के साथ अनन्य चित्त होकर साधन-भजन की सहायता से केवल ईश्वर की उपलब्धि की चेष्टा करना ही रामकृष्ण देव का आदर्श था। स्वामी जी पहले तो मुस्कुराते रहे,
बलराम बाबू के मकान पर स्वामी जी गुरू-भाइयों के साथ वार्तालाप कर रहे थे। इसी समय उनके एक सन्यासी गुरू-भाई ने सहसा प्रश्न किया कि वे श्री रामकृष्ण का प्रचार क्यों नहीं कर रहे हैं तथा श्री रामकृष्ण की शिक्षा के साथ उनके द्वारा प्रचारित आदर्शों का सामंजस्य कहां है? एकान्त भक्ति के साथ अनन्य चित्त होकर साधन-भजन की सहायता से केवल ईश्वर की उपलब्धि की चेष्टा करना ही रामकृष्ण देव का आदर्श था। स्वामी जी पहले तो मुस्कुराते रहे,