योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



विश्लेषण के लिए हम उनकी उक्त सुअर वाली उपमा को लेंगे और देखेंगे कि ‘मुझमें और सुअर में केवल मात्रा का अंतर है- सुअर कम अभिव्यक्त हुआ और मैं अधिक’ का खटराग क्या है?

वेदान्त दर्शन के अनुसार, ‘‘उच्चतम से लेकर निम्नतम और दुष्टतम मनुष्य तक में मनुष्यों में महानतम व्यक्तियों से लेकर हमारे पैरों के नीचे रेंगने वाले कीड़े तक में शुद्व और पूर्ण अनन्त और सदा मंगलमय आत्मा विद्यमान है। कीड़े में आत्मा अपनी शक्ति और शुद्वता का एक


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विश्लेषण के लिए हम उनकी उक्त सुअर वाली उपमा को लेंगे और देखेंगे कि ‘मुझमें और सुअर में केवल मात्रा का अंतर है- सुअर कम अभिव्यक्त हुआ और मैं अधिक’ का खटराग क्या है?

वेदान्त दर्शन के अनुसार, ‘‘उच्चतम से लेकर निम्नतम और दुष्टतम मनुष्य तक में मनुष्यों में महानतम व्यक्तियों से लेकर हमारे पैरों के नीचे रेंगने वाले कीड़े तक में शुद्व और पूर्ण अनन्त और सदा मंगलमय आत्मा विद्यमान है। कीड़े में आत्मा अपनी शक्ति और शुद्वता का एक


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