अणुतुल्य शुद्व अंश ही व्यक्त कर रही है। और महानतम मनुष्य में उनका सर्वाधिक अंतर अभिव्यक्ति के परिमाण का है, मूल तत्व में नही। सभी आत्माओं में वही शुद्व और पूर्ण आत्मा विद्यमान है।’’ (अष्टम खंड, पृष्ठ 99)
मतलब यह कि चींटी, सुअर और मनुष्य में एक ही शुद्व, पवित्र और पूर्ण आत्मा है क्योंकि वह शुद्व, पवित्र और अनन्त ब्रह्म के अतिरिक्त कुछ और नहीं। अंतर सिर्फ यह है कि चींटी में वह सुअर से कम अभिव्यक्त और मनुष्य में सुअर से
अणुतुल्य शुद्व अंश ही व्यक्त कर रही है। और महानतम मनुष्य में उनका सर्वाधिक अंतर अभिव्यक्ति के परिमाण का है, मूल तत्व में नही। सभी आत्माओं में वही शुद्व और पूर्ण आत्मा विद्यमान है।’’ (अष्टम खंड, पृष्ठ 99)
मतलब यह कि चींटी, सुअर और मनुष्य में एक ही शुद्व, पवित्र और पूर्ण आत्मा है क्योंकि वह शुद्व, पवित्र और अनन्त ब्रह्म के अतिरिक्त कुछ और नहीं। अंतर सिर्फ यह है कि चींटी में वह सुअर से कम अभिव्यक्त और मनुष्य में सुअर से