आत्मा का लक्ष्य मुक्ति है और मुक्ति प्राप्त करने के लिए उसे संसार में जितने जीव हैं, उतनी ही योनियों में से होकर गुज़रना पड़ता है। एक जन्म से दूसरे जन्म में जाने का क्रम यह बताया गया है, ‘‘आत्मा एक निम्नतर देह धारण करके उसके माध्यम से अपने को व्यक्त करने का प्रयास जैसा करती है वह उसको अपर्याप्त पाती है, उसे त्यागकर एक उच्चतर देह धारण करती है। उसके द्वारा वह अपने को व्यक्त करने का प्रयत्न करती है। वह भी अपर्याप्त पाए जाने
आत्मा का लक्ष्य मुक्ति है और मुक्ति प्राप्त करने के लिए उसे संसार में जितने जीव हैं, उतनी ही योनियों में से होकर गुज़रना पड़ता है। एक जन्म से दूसरे जन्म में जाने का क्रम यह बताया गया है, ‘‘आत्मा एक निम्नतर देह धारण करके उसके माध्यम से अपने को व्यक्त करने का प्रयास जैसा करती है वह उसको अपर्याप्त पाती है, उसे त्यागकर एक उच्चतर देह धारण करती है। उसके द्वारा वह अपने को व्यक्त करने का प्रयत्न करती है। वह भी अपर्याप्त पाए जाने