पर त्याग दी जाती है और वह उच्चतर देह आ जाती है, इसी प्रकार यह क्रम एक ऐसा शरीर प्राप्त हो जाने तक निरन्तर चलता रहता है, जिसके द्वारा आत्मा मुक्त हो जाती है।’’ (वही, पृष्ठ 97)
विवेकानन्द के अनुसार यह क्रम निम्नतम जीव अमीबा से शुरू होता है। मनुष्य सृष्टि का श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम प्राणी है। अर्थात् देह तक पहुंचते-पहुंचते आत्मा अपने को इतना अधिक अभिव्यक्त कर लेती है कि मनुष्य को अपने आत्माास्वरूप
149 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पर त्याग दी जाती है और वह उच्चतर देह आ जाती है, इसी प्रकार यह क्रम एक ऐसा शरीर प्राप्त हो जाने तक निरन्तर चलता रहता है, जिसके द्वारा आत्मा मुक्त हो जाती है।’’ (वही, पृष्ठ 97)
विवेकानन्द के अनुसार यह क्रम निम्नतम जीव अमीबा से शुरू होता है। मनुष्य सृष्टि का श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम प्राणी है। अर्थात् देह तक पहुंचते-पहुंचते आत्मा अपने को इतना अधिक अभिव्यक्त कर लेती है कि मनुष्य को अपने आत्माास्वरूप
149 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द