रायपुर मध्यप्रदेश का एक नगर है। उस समय सारे मध्यप्रदेश में रेलगाड़ी नहीं थी। इलाहाबाद और जबलपुर होते हुए कलकत्ता से नागपुर तक गाड़ी आती थी। नागपुर से रायपुर जाने में दो सप्ताह से अधिक लगते थे और हिंसक जन्तुओं वाले घने जंगल में से बैलगाड़ी द्वारा जाना पड़ता था। बाद में इस यात्रा का उल्लेख करते हुए नरेन्द्रनाथ ने लिखा है, ‘‘वनस्थली का सौंदर्य देखकर मुझे रास्ते के कष्ट, कष्ट ही मालूम नहीं हुए। विंध्य पर्वत की आकाश को चुमती हुई चोटियां,
रायपुर मध्यप्रदेश का एक नगर है। उस समय सारे मध्यप्रदेश में रेलगाड़ी नहीं थी। इलाहाबाद और जबलपुर होते हुए कलकत्ता से नागपुर तक गाड़ी आती थी। नागपुर से रायपुर जाने में दो सप्ताह से अधिक लगते थे और हिंसक जन्तुओं वाले घने जंगल में से बैलगाड़ी द्वारा जाना पड़ता था। बाद में इस यात्रा का उल्लेख करते हुए नरेन्द्रनाथ ने लिखा है, ‘‘वनस्थली का सौंदर्य देखकर मुझे रास्ते के कष्ट, कष्ट ही मालूम नहीं हुए। विंध्य पर्वत की आकाश को चुमती हुई चोटियां,