फूलों और फलों से लदी हुई तरह-तरह की बेलें, कंुज-कुंज में चहचहाते हुए रंग-बिरंगें पक्षी, जो कभी-कभी आहार की खोज में भूमि पर उतर जाते थे। नरेन्द्र ने यह सब कुछ पहले-पहल देखा था। देश के अतीत की कहानियां उसके मन पर पहले ही से अंकित थी, अब उसका रूप, उसका वैभव, विशालता और महानता भी अंकित हो गई। देश को और अधिक देखने की इच्छा भी यहीं से पैदा हुई।
यह वह अवस्था थी, जब चरित्र का निर्माण होता है। नरेन्द्र के चरित्र का वास्तविक
फूलों और फलों से लदी हुई तरह-तरह की बेलें, कंुज-कुंज में चहचहाते हुए रंग-बिरंगें पक्षी, जो कभी-कभी आहार की खोज में भूमि पर उतर जाते थे। नरेन्द्र ने यह सब कुछ पहले-पहल देखा था। देश के अतीत की कहानियां उसके मन पर पहले ही से अंकित थी, अब उसका रूप, उसका वैभव, विशालता और महानता भी अंकित हो गई। देश को और अधिक देखने की इच्छा भी यहीं से पैदा हुई।
यह वह अवस्था थी, जब चरित्र का निर्माण होता है। नरेन्द्र के चरित्र का वास्तविक