मकान बनाऊंगा। और प्रकृति के साथ युद्व करूंगा।’ और वह ऐसा कर भी रहा है। मानव जाति का इतिहास प्रकृति नियमों के साथ उसके युद्व का इतिहास है और अंत में मनुष्य ही प्रकृति पर विजय प्राप्त करता है। अंतर्जगत् में जाकर देखो, यहां भी यही युद्व चल रहा है-पशु मानव और आध्यात्मिक मानव का, प्रकाश और अंधकार का यह संग्राम निरन्तर जारी है। मानव यहां भी जीत रहा है। मुक्ति की प्राप्ति के लिए प्रकृति के बंधन को चीरकर मनुष्य अपने गन्तव्य मार्ग को प्राप्त कर लेता है।’’ (द्वितीय खंड,
मकान बनाऊंगा। और प्रकृति के साथ युद्व करूंगा।’ और वह ऐसा कर भी रहा है। मानव जाति का इतिहास प्रकृति नियमों के साथ उसके युद्व का इतिहास है और अंत में मनुष्य ही प्रकृति पर विजय प्राप्त करता है। अंतर्जगत् में जाकर देखो, यहां भी यही युद्व चल रहा है-पशु मानव और आध्यात्मिक मानव का, प्रकाश और अंधकार का यह संग्राम निरन्तर जारी है। मानव यहां भी जीत रहा है। मुक्ति की प्राप्ति के लिए प्रकृति के बंधन को चीरकर मनुष्य अपने गन्तव्य मार्ग को प्राप्त कर लेता है।’’ (द्वितीय खंड,