और स्वर्गस्थ पित् आदि की समस्त धारणा तुम्हारा ही प्रतिबिम्ब मात्र हैं, ईश्वर स्वयं ही तुम्हारा प्रतिबिम्ब या प्रतिमा स्वरूप है। ‘ईश्वर ने मानव की अपने प्रतिबिम्ब के रूप में सृष्टि की’-यह भूल है। मनुष्य ईश्वर की निज के प्रतिबिम्ब के अनुसार सृष्टि करता है-यह बात ही सत्य है। समस्त जगत् ही में हम अपने प्रतिबिम्ब के अनुसार ईश्वर अथवा देवगण की सृष्टि करते हैं।’’ (षष्टम खंड, पृष्ठ 285)
भौतिकवादी जर्मन दार्शनिक फथोर्बाख भी
और स्वर्गस्थ पित् आदि की समस्त धारणा तुम्हारा ही प्रतिबिम्ब मात्र हैं, ईश्वर स्वयं ही तुम्हारा प्रतिबिम्ब या प्रतिमा स्वरूप है। ‘ईश्वर ने मानव की अपने प्रतिबिम्ब के रूप में सृष्टि की’-यह भूल है। मनुष्य ईश्वर की निज के प्रतिबिम्ब के अनुसार सृष्टि करता है-यह बात ही सत्य है। समस्त जगत् ही में हम अपने प्रतिबिम्ब के अनुसार ईश्वर अथवा देवगण की सृष्टि करते हैं।’’ (षष्टम खंड, पृष्ठ 285)
भौतिकवादी जर्मन दार्शनिक फथोर्बाख भी