और फिर जैसा कि वे हमेशा करते थे, धर्म का विज्ञान से सामंजस्य स्थापित करने के प्रयास में कहा:
‘‘बहिर्वादी और अन्तर्वादी अर्थात् भौतिकवादी और आदर्शवादी, जब अपने ज्ञान की चरम सीमा प्राप्त कर लेंगे, तब दोनों अवश्य एक ही स्थान पर पहुंच जाएंगे। जैसे भौतिक विज्ञानी जब अपने ज्ञान को चरम सीमा पर ले जाएंगे, तो उन्हें दार्शनिक होना होगा, उसी प्रकार दार्शनिक भी देखेंगे कि वे अपने मन और भूत के नाम से जो दो भेद कर रहे थे वह वास्तव में कल्पना मात्र हैं,
और फिर जैसा कि वे हमेशा करते थे, धर्म का विज्ञान से सामंजस्य स्थापित करने के प्रयास में कहा:
‘‘बहिर्वादी और अन्तर्वादी अर्थात् भौतिकवादी और आदर्शवादी, जब अपने ज्ञान की चरम सीमा प्राप्त कर लेंगे, तब दोनों अवश्य एक ही स्थान पर पहुंच जाएंगे। जैसे भौतिक विज्ञानी जब अपने ज्ञान को चरम सीमा पर ले जाएंगे, तो उन्हें दार्शनिक होना होगा, उसी प्रकार दार्शनिक भी देखेंगे कि वे अपने मन और भूत के नाम से जो दो भेद कर रहे थे वह वास्तव में कल्पना मात्र हैं,