जो देश-काल-निमित्त से परे है, उसके अस्तित्व का क्या प्रमाण है? जो इंद्रयातीत है उसका साक्षात्कार कैसे सम्भव है?
अगर इंद्रियातीत सत्य का साक्षात् ही अनन्त ज्ञान और अनन्त सुख की उपलब्धि है तो हमें इंग्लैंड अथवा पाश्चात्य देशों से इस लोक में सुखी रहने के उपाय सीखने और बदले में उन्हें अनन्त काल तक सुखी रहने के उपाय बताने का अर्थ क्या है।
फिर इस इंद्रियातीत सत्य-ईश्वर का साक्षात् करने की धुन में जंगल-जंगल घूमने वाले
जो देश-काल-निमित्त से परे है, उसके अस्तित्व का क्या प्रमाण है? जो इंद्रयातीत है उसका साक्षात्कार कैसे सम्भव है?
अगर इंद्रियातीत सत्य का साक्षात् ही अनन्त ज्ञान और अनन्त सुख की उपलब्धि है तो हमें इंग्लैंड अथवा पाश्चात्य देशों से इस लोक में सुखी रहने के उपाय सीखने और बदले में उन्हें अनन्त काल तक सुखी रहने के उपाय बताने का अर्थ क्या है।
फिर इस इंद्रियातीत सत्य-ईश्वर का साक्षात् करने की धुन में जंगल-जंगल घूमने वाले