का विषय है।’’ और यम के इस उत्तर की व्याख्या करने की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ओढ़कर विवेकानन्द कहते हैं, ‘‘हम लोग बराबर सुनते आ रहे हैं कि प्रत्येक धर्म विश्वास करने पर बल देता है। हमने आंखें बंद करके विश्वास करने की शिक्षा पाई है। यह अंधविश्वास सचमुच ही बुरी वस्तु है, इसमें कोई संदेह नहीं। पर यदि इस अन्धविश्वास का हम विश्लेषण करके देखें, तो ज्ञात होगा कि इसके पीछे एक महान सत्य है।’’ (द्वितीय खंड, पृष्ठ 165)
यह महान सत्य क्या
का विषय है।’’ और यम के इस उत्तर की व्याख्या करने की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ओढ़कर विवेकानन्द कहते हैं, ‘‘हम लोग बराबर सुनते आ रहे हैं कि प्रत्येक धर्म विश्वास करने पर बल देता है। हमने आंखें बंद करके विश्वास करने की शिक्षा पाई है। यह अंधविश्वास सचमुच ही बुरी वस्तु है, इसमें कोई संदेह नहीं। पर यदि इस अन्धविश्वास का हम विश्लेषण करके देखें, तो ज्ञात होगा कि इसके पीछे एक महान सत्य है।’’ (द्वितीय खंड, पृष्ठ 165)
यह महान सत्य क्या