हो गया है। उसने भी इस तथ्य को समझ लिया है कि संसार में जो कुछ हम देख रहे हैं, वह एक पदार्थ ही के अनेक रूप हैं। पदार्थ ही वह सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान, अजर, अमर सत्ता है, अध्यात्मवादियों ने जिसका नाम ईश्वर रख लिया है। अध्यात्मवादियों ने अपने कल्पित भगवान में जितने गुण आरोपित किए हैं, वे सब पदार्थ में मौजुद हैं।
गति के बिना पदार्थ का कोई अस्तित्व नहीं। पदार्थ की यह गति देश और काल में होती है। पदार्थ के बिना देश और काल का,
हो गया है। उसने भी इस तथ्य को समझ लिया है कि संसार में जो कुछ हम देख रहे हैं, वह एक पदार्थ ही के अनेक रूप हैं। पदार्थ ही वह सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान, अजर, अमर सत्ता है, अध्यात्मवादियों ने जिसका नाम ईश्वर रख लिया है। अध्यात्मवादियों ने अपने कल्पित भगवान में जितने गुण आरोपित किए हैं, वे सब पदार्थ में मौजुद हैं।
गति के बिना पदार्थ का कोई अस्तित्व नहीं। पदार्थ की यह गति देश और काल में होती है। पदार्थ के बिना देश और काल का,