देश और काल के बिना पदार्थ का कोई अस्तित्व नहीं। यही आइंस्टीन का सापेक्षितावाद है।
द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सिद्वान्त भी इस नियम का अपवाद नहीं है। हेगल ने अपने चिंतन की चरम सीमा निर्धारित करके क्रम विकास के सिद्वान्त को झुठलाया था और विवेकानन्द ने भी झुठलाया है। लेकिन भौतिकवादी मानव चिंतन की कोई सीमा निर्धारित नहीं करते, उस पर विरामचिहृ नहीं लगाते। द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सिद्वान्त माक्र्स और एंगेल्स ने प्रतिपादित
देश और काल के बिना पदार्थ का कोई अस्तित्व नहीं। यही आइंस्टीन का सापेक्षितावाद है।
द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सिद्वान्त भी इस नियम का अपवाद नहीं है। हेगल ने अपने चिंतन की चरम सीमा निर्धारित करके क्रम विकास के सिद्वान्त को झुठलाया था और विवेकानन्द ने भी झुठलाया है। लेकिन भौतिकवादी मानव चिंतन की कोई सीमा निर्धारित नहीं करते, उस पर विरामचिहृ नहीं लगाते। द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सिद्वान्त माक्र्स और एंगेल्स ने प्रतिपादित