किया। लेनिन और माओत्से तुंग ने उसे विकसित किया और समृद्व बनाया। उनके अलावा और अनेक माक्र्सवादी विचारक उसे कमोबेश विकसित कर रहे हैं और समृद्व बना रहे हैं। यह विकास तब तक जारी रहेगा जब तक जीवन है।
फिर द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के किसी भी स्तर पर मनुष्य प्रकृति के नियमों का उल्लंघन नहीं करता और न वह उनसे ऊपर उठता है, बल्कि वह उन्हें समझकर उन्हें उपयोग में लाता और उनसे लाभ उठाता है।
द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद ने यह सिद्व करके कि गति और चेतना पदार्थ ही के गुण हैं,
किया। लेनिन और माओत्से तुंग ने उसे विकसित किया और समृद्व बनाया। उनके अलावा और अनेक माक्र्सवादी विचारक उसे कमोबेश विकसित कर रहे हैं और समृद्व बना रहे हैं। यह विकास तब तक जारी रहेगा जब तक जीवन है।
फिर द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के किसी भी स्तर पर मनुष्य प्रकृति के नियमों का उल्लंघन नहीं करता और न वह उनसे ऊपर उठता है, बल्कि वह उन्हें समझकर उन्हें उपयोग में लाता और उनसे लाभ उठाता है।
द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद ने यह सिद्व करके कि गति और चेतना पदार्थ ही के गुण हैं,