आध्यात्मिक अद्वैतवाद को भौतिकवाद बना दिया है। यों दर्शन विज्ञान बन गया है और विज्ञान दर्शन। ईश्वरकल्पना अर्थात् अमरत्व की भावना ने जिस चोरदरवाजे़ से सांख्य दर्शन में प्रवेश किया था, वह चोर दरवाज़ा बंद करवा दिया है।
विज्ञान का धर्म से कदािचत् कोई समझौता नहीं। माक्र्स कहता है, ‘‘किसी राष्ट्र का सिद्वान्त उसी हद तक यथार्थ है, जिस हद तक वह उस राष्ट्र की आवश्यकताओं का यथार्थीकरण कर पाता है।’’ इसी बात को माओत्से तंुग ने यांे कहा है,
आध्यात्मिक अद्वैतवाद को भौतिकवाद बना दिया है। यों दर्शन विज्ञान बन गया है और विज्ञान दर्शन। ईश्वरकल्पना अर्थात् अमरत्व की भावना ने जिस चोरदरवाजे़ से सांख्य दर्शन में प्रवेश किया था, वह चोर दरवाज़ा बंद करवा दिया है।
विज्ञान का धर्म से कदािचत् कोई समझौता नहीं। माक्र्स कहता है, ‘‘किसी राष्ट्र का सिद्वान्त उसी हद तक यथार्थ है, जिस हद तक वह उस राष्ट्र की आवश्यकताओं का यथार्थीकरण कर पाता है।’’ इसी बात को माओत्से तंुग ने यांे कहा है,