‘‘दर्शन का भविष्य सामाजिक वर्गों की आवश्यकताएं पूरी करने ही पर निर्भर हैं।’’
वेदान्त दर्शन के सिद्वान्त ने हमारे देश के शोषक वर्गों की सामाजिक
153 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
आवश्यकताओं को कैसे पूरा किया, उसके इस व्यावहारिक पक्ष पर हम अगले परिच्छेद में विचार करेंगे। पर सैद्वान्तिक पक्ष पर विचार करके हम यह देख चुके हैं कि मोक्ष अथवा निर्वाण की इच्छा पहले-पहल शोषक वर्गों ही के मन में उत्पन्न हुई। शरीर और मन से परे
‘‘दर्शन का भविष्य सामाजिक वर्गों की आवश्यकताएं पूरी करने ही पर निर्भर हैं।’’
वेदान्त दर्शन के सिद्वान्त ने हमारे देश के शोषक वर्गों की सामाजिक
153 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
आवश्यकताओं को कैसे पूरा किया, उसके इस व्यावहारिक पक्ष पर हम अगले परिच्छेद में विचार करेंगे। पर सैद्वान्तिक पक्ष पर विचार करके हम यह देख चुके हैं कि मोक्ष अथवा निर्वाण की इच्छा पहले-पहल शोषक वर्गों ही के मन में उत्पन्न हुई। शरीर और मन से परे