‘आत्मा’ नाम के स्वतंत्र तत्व की कल्पना करने तथा उसे चोर दरवाजे़ से सांख्य दर्शन में प्रविष्ट करने वाले भी वही हैं।
इस संदर्भ में विवेकानन्द की ऐतिहासिक भूमिका यह है कि उन्होंने वेदान्त दर्शन में क्रम-विकास का सिद्वान्त जोड़कर इसे साम्राज्यवादियों और तथाकथित सुधारकों के विरूद्व लड़ने का शस्त्र बनाया और यों उसे हमारे देश के उभरते हुए पूंजीपति वर्ग की सामाजिक आवश्यकता के अनुकूल बनाने का प्रयास किया।
और हम यह भी देख चुके
‘आत्मा’ नाम के स्वतंत्र तत्व की कल्पना करने तथा उसे चोर दरवाजे़ से सांख्य दर्शन में प्रविष्ट करने वाले भी वही हैं।
इस संदर्भ में विवेकानन्द की ऐतिहासिक भूमिका यह है कि उन्होंने वेदान्त दर्शन में क्रम-विकास का सिद्वान्त जोड़कर इसे साम्राज्यवादियों और तथाकथित सुधारकों के विरूद्व लड़ने का शस्त्र बनाया और यों उसे हमारे देश के उभरते हुए पूंजीपति वर्ग की सामाजिक आवश्यकता के अनुकूल बनाने का प्रयास किया।
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