योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



मौत क्या है, इन्हीं अजज़ा का परेशां होना।

अर्थात्, जीवन क्या है, पंच तत्वों के संगठन की अभिव्यक्ति। और इन्हीं तत्वों के विघटन का नाम मृत्यु है।

लेनिन का मत है, ‘‘मनुष्य को एक ही जीवन रहने को मिलता है। वह इस प्रकार जिए कि मरते समय मन में यह खेद उत्पन्न न हो कि मैंने इसे व्यर्थ खो दिया।


वेदान्त बनाम ऐतिहासिक भौतिकवाद

‘‘हम अनेक विषयों में मुख्य वस्तु को भूलकर सिर्फ छिलके ही लेकर बहुत-कुछ उछल-कूद मचाते हैं।’’

-विवेकानन्द


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मौत क्या है, इन्हीं अजज़ा का परेशां होना।

अर्थात्, जीवन क्या है, पंच तत्वों के संगठन की अभिव्यक्ति। और इन्हीं तत्वों के विघटन का नाम मृत्यु है।

लेनिन का मत है, ‘‘मनुष्य को एक ही जीवन रहने को मिलता है। वह इस प्रकार जिए कि मरते समय मन में यह खेद उत्पन्न न हो कि मैंने इसे व्यर्थ खो दिया।


वेदान्त बनाम ऐतिहासिक भौतिकवाद

‘‘हम अनेक विषयों में मुख्य वस्तु को भूलकर सिर्फ छिलके ही लेकर बहुत-कुछ उछल-कूद मचाते हैं।’’

-विवेकानन्द


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