धर्म का भी यथार्थीकरण होता चला गया और उसका व्यावहारिक रूप निरन्तर बदलता रहा। ऐतिहासिक भौतिकवाद का यह नियम जैसे सब देशों पर लागू हुआ, वैसे ही हमारे देश पर भी लागू हुआ। यह एक निरपेक्ष सत्य है, जो किसी भी देश की विशिष्ट परिस्थितियांे पर लागू होते समय सापेक्ष तो बन जाता है, पर कोई भी देश इसका अपवाद नहीं, और हमारा भी नहीं। इसलिए धर्म किसी भी प्राच्य या पाश्चात्य राष्ट्र का विशेषाधिकार नहीं, हमारा भी नहीं और होना भी नहीं चाहिए।
धर्म का भी यथार्थीकरण होता चला गया और उसका व्यावहारिक रूप निरन्तर बदलता रहा। ऐतिहासिक भौतिकवाद का यह नियम जैसे सब देशों पर लागू हुआ, वैसे ही हमारे देश पर भी लागू हुआ। यह एक निरपेक्ष सत्य है, जो किसी भी देश की विशिष्ट परिस्थितियांे पर लागू होते समय सापेक्ष तो बन जाता है, पर कोई भी देश इसका अपवाद नहीं, और हमारा भी नहीं। इसलिए धर्म किसी भी प्राच्य या पाश्चात्य राष्ट्र का विशेषाधिकार नहीं, हमारा भी नहीं और होना भी नहीं चाहिए।